• २०८२ फाल्गुन २७ गते बुधवार
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ओली सरकार के तख्तापलट के बाद नेपाल की धरती पर चीन पहुंचने के लिए पक्की सड़क बना रहा भारत


काठमांडू। हाल ही में नेपाली सेना के बैरक के ऊपर से भारतीय सेना के हेलीकॉप्टरों के उड़ने की तस्वीरें और दृश्य नेपाली आसमान में सामने आए हैं।

सरकार ने इस संबंध में कुछ नहीं कहा है। नेपाल सरकार ने इस खबर पर कोई टिप्पणी नहीं की है कि भारतीय हेलीकॉप्टर दारचुला जिले में नेपाल के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन कर उड़ान भर रहे हैं।

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इस संदर्भ में सीपीएन-यूएमएल नेता डॉ. भीम रावल ने सवाल किया है कि नेपाली सरकार ने दारचुला जिले में नेपाल के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करते हुए भारतीय हेलीकॉप्टरों को लगातार उड़ान भरने की अनुमति दी है।

उन्होंने लिखा, ‘क्या नेपाल सरकार को पता है कि दारचुला जिले में भारतीय हेलीकॉप्टर नेपाल के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करते हुए लगातार उड़ान भर रहे हैं?

यदि हां, तो किस प्रयोजन से ? क्या गठबंधन के लिए सरकार सिर्फ मंत्रियों को बांटने, पार्टी को बांटने और सरकार की हत्या करने या देश और लोगों की रक्षा करने के लिए है?

स्थानीय लोगों का दावा है कि नेपाली जमीन पर बनी सड़क को पूरा करने के लिए हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी थी. वहां बहुत तेजी से काम हो रहा है।

स्थानीय लोगों ने जानकारी दी है कि सरकार बदलने से काम तेज गति से चल रहा है. नेपाल के रास्ते भारत चीन के पवित्र धार्मिक स्थल मानसरोवर के लिए सड़क बना रहा है।

जब तत्कालीन सीपीएन-यूएमएल अध्यक्ष केपी शर्मा ओली प्रधानमंत्री थे, तब सरकार ने इसकी जमीन पर दावा किया था और इस संबंध में पहली बार नक्शा तैयार किया था।

इसका फायदा उठाकर भारत उस सड़क को और भी तेजी से बना रहा है। वह सड़क 2006 से निर्माणाधीन है। इस दौरान गिरिजा प्रसाद कोइराला, सुशील कोइराला, पुष्प कमल दहल प्रचंड, डॉ. बाबूराम भट्टराई, खिलनाथ रेग्मी, झाला नाथ खनाल, माधव कुमार नेपाल और शेर बहादुर देउबा प्रधान मंत्री बने लेकिन किसी ने बात नहीं की।

तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के कार्यकाल में सड़क का उद्घाटन होने के बाद ओली सरकार ने भी इसका विरोध करते हुए चुच्चे का नक्शा जारी किया था ( india nepal dispute map ) । यही कारण है कि भारतीय सत्ता ने ओली के नेतृत्व वाली सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए नेपाल के राजनीतिक दलों को विभाजित करने की साजिश रची है।

 

प्रकाशित मिति : २०७८ भाद्र १९ गते शनिवार